गोरखपुर, अक्टूबर 9 -- Gorakhpur News: गोरखपुर। प्लास्टिक के पांच मिलीमीटर से छोटे कण यानी माइक्रोप्लास्टिक पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन रहे हैं। ये पानी, हवा, मिट्टी और भोजन के अलावा रोजमर्रा की कई वस्तुओं से भी शरीर तक पहुंच रहे हैं। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के शोधार्थी शिवम कुमार यादव, प्रो. विनय कुमार सिंह के निर्देशन में माइक्रोप्लास्टिक और जलीय पारिस्थितिकी पर अध्ययन कर रहे हैं। बताया कि प्लास्टिक पैकेजिंग, पैक्ड दूध, खाद्य तेल, टॉफी-कैंडी, चाय की थैली, डिस्पोजेबल कप, फीडिंग बोतल, टूथब्रश, सौंदर्य प्रसाधन और सिंथेटिक कपड़े इसके संभावित स्रोत हैं। वाहनों के टायरों के घिसने से भी सूक्ष्म प्लास्टिक कण निकलते हैं।शोधों यह भी पढ़ें- Biharsharif News: बालिकाओं को अब मिलेंगे बायोडि...