गोड्डा, अक्टूबर 26 -- Godda News: सुबह की हल्की धूप आंगन में उतर रही है। एक ओर मिट्टी का ढेर है, तो दूसरी ओर कतार में रखे सैकड़ों दीए और छोटे-छोटे बर्तन। कुम्हार मिट्टी को आकार देने में जुटे हैं। चाक पर घूमती मिट्टी धीरे-धीरे दीए का रूप ले रही है। चेहरे पर मेहनत की झलक है, तो मन में दीपावली को लेकर उम्मीदें। यह दृश्य महागामा प्रखंड क्षेत्र के विश्वासखानी गांव का है, जहां आज भी कुम्हार अपनी पुश्तैनी कला को जिंदा रखने में जुटे हैं। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही कुम्हारों के घरों में रौनक बढ़ने लगती है। कोई दीये बना रहा है, तो कोई उन्हें सुखाने और बिक्री के लिए तैयार करने में लगा है। उनके लिए दीपावली केवल रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि सालभर की मेहनत को बाजार तक पहुंचाने का एक खास अवसर भी है। मिट्टी के इन छोटे-छोटे दीयों में उनकी मेहनत, उम्म...