घाटशिला, सितम्बर 5 -- Ghatsila News: मुसाबनी। कहा जाता है कि इरादे पक्के हो तो कुछ भी संभव है, चाहे यह इरादा एक महिला का हो, पुरुष का हो, बुजुर्ग का हो या बच्चों का हो, क्षेत्र में ऐसी कई महिलाएं हैं जो बांस से बनी टोकरी, सूप आदि घरेलू सामान बनाकर अपने और अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं। ऐसी कई महिलाएं जो बाजार में अपने हाथ से बनाई हुई टोकरी सूप, बांस की झाड़ू आदि बनाकर आमदनी का सृजन कर रही है। इसमें से कई महिलाएं बताती है कि सबसे पहले बांस लाकर उसे काटना पड़ता है, इसके बाद अपने इस पुश्तैनी काम को जिसे हम अपने बुजुर्गों से सीखा है। इन्हें बेचने के लिए आसपास के बाजारों में जाना पड़ता है। इन्हें बनाने वाली महिला लक्ष्मी कहती हैं कि इसमें हमें सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है।

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