फिरोजाबाद, अगस्त 11 -- Firozabad News: नगर के शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रही चातुर्मास कार्यक्रम में प्रवचन करते हुए जैन संत विश्रांत सागर ने परमात्मा की महिमा और महत्व को समझाया। जैन मुनि ने कहा कि संसार में आप जो करना चाहो कर सकते हो पर जब आगम अनुसार हम पुरुषार्थ करते है, तो परमात्मा बन सकते हैं परमात्मा का पद सर्वोच्च है। जब परमात्मा का पद पुरुषार्थ द्वारा प्राप्त किया जा सकता हैं, तो संसार में ऐसा कौन सा पद है, जिसे हम प्राप्त नहीं कर सकते। हार होना कार्य असंभव का प्रतीक नहीं है बल्कि एक बड़ी चुनौती होती है। उसे चुनौती को भी जब हम चुनौती दे देते हैं, तो हमें बहुत बड़ी सफलता प्राप्त हो जाती है कितनी भी परिस्थितियों सामने हो कितनी भी आंधी तूफान हो फिर भी डरो नहीं बल्कि आगे बढ़ते जाओ मेहनत करते जाओ, सफलता आपके साथ-साथ चलेगी सफलता भी ...