प्रयागराज, सितम्बर 5 -- Allahabad Highcourt Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न किए जाने के मामले में सीधे अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि पीड़ित को पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में उपलब्ध वैधानिक उपायों का इस्तेमाल करना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट को प्रथम मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने रमेश उपाध्याय की याचिका पर दिया। याची ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के कथित बयानों को लेकर एफआईआर दर्ज कराने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की थी। याची का कहना था कि एक अक्तूबर 2025 को वाराणसी में कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो दिखाया, जिसमें एक विशेष...