फतेहपुर, सितम्बर 4 -- Fatehpur News: शिक्षक सिर्फ किताबों का पाठ पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि बच्चों की सोच को नया आकार देने वाले शिल्पी होते हैं। संसाधनों की कमी का रोना रोने के बजाय दोआबा के परिषदीय स्कूलों के इन 'सुपर गुरुजी' ने अपने नवाचार, कड़ी मेहनत और जनसहयोग से शिक्षा का ऐसा माहौल तैयार किया है, जो बड़े-बड़े कॉन्वेंट और प्राइवेट स्कूलों को सीधी टक्कर दे रहा है। वातानुकूलित कक्षाओं से लेकर सुंदर पार्कों, 'कबाड़ से जुगाड़' टीएलएम और अनुशासित वातावरण के दम पर इन शिक्षकों ने न केवल नामांकन बढ़ाया है, बल्कि अभिभावकों का अटूट विश्वास भी जीता है। शिक्षक दिवस के अवसर पर पढ़िए दोआबा के उन समर्पित शिक्षकों की प्रेरक कहानी, जिन्होंने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी है। यह भी पढ़ें- किसी ने स्कूल संवारा तो कोई बच्चों का भविष्य...