नई दिल्ली, जुलाई 26 -- सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ रातों की नींद ही नहीं उड़ानी पड़ती कई बार सिस्टम और किताबों की दुनिया से बाहर निकलकर खुद अपने हक की लड़ाई भी लड़नी पड़ती है। मध्य प्रदेश के 19 साल के नौजवान अथर्व चतुर्वेदी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है, जहां एक आम घर का लड़का जिसे कानून की कोई एबीसीडी नहीं पता, वो देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने खड़ा होता है और अपना हक छीन कर लाता है। अथर्व को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे के तहत MBBS की सीट नहीं मिल रही थी। लेकिन उसने हार मानने के बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, खुद अपना केस लड़ा और जीत हासिल की। अथर्व की इस जीत की कहानी के माध्यम से उस बहस को भी दोबारा बात करेंगे जिसे लेकर हमेशा चर्चा होती है।जब सिस्टम ने रोके रास्ते तो खु...