Etah News: षटरस के त्याग के साथ परनिंदा रस का त्याग भी जरूरी : आचार्य नयन सागर
एटा, अगस्त 4 -- Etah News: पुरानी बस्ती स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य नयन सागर महाराज ने श्रावकों को बताया कि अगर धर्म को समझना है तो त्याग करना पड़ेगा। महावीर प्रभु ने जब त्याग किया था तब वह उर्ध्वगामी बने। जो व्यक्ति षटरस का त्याग करता है। आचार्यश्री ने कहा कि तीर्थंकर प्रभु जिस दिन से दीक्षा लेते हैं। जब तक केवल ज्ञान नहीं हो जाता मौन रहते हैं। अखंड मौन साधना करते हैं। महावीर स्वामी के मोक्ष जाने से पूर्व गौतम स्वामी चिंतित हैं। व्याकुल है कि हे प्रभु आप मोक्ष चले जाओगे। आपके जाने के बाद हम कैसे जियें, कैसे रहें। कैसे उठें कैसे बैठें यह हमें कौन बताएगा। प्रभु महामौनी है। अपनी दिव्य ध्वनि के माध्यम से बताया कि कब, क्या, कैसे किससे कहां बोलें इसका महत्व है। उपवास के दिन खाद्य ,स्वाद लेह्यऔर पेय इन चारों प्रकार के आहार का त...
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