एटा, अगस्त 17 -- Etah News: पुरानी बस्ती स्थित बड़े मंदिर में आचार्य नयन सागर जी महाराज ने श्रावकों को बताया कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने उपदेश में सिर्फ श्रमण और श्रावक की बात कही है। श्रावक बनो या श्रमण बनो। यदि श्रावक धर्म का पालन कर चुके हो तो फिर श्रमण (साधु) के धर्म में लग जाओ। आचार्यश्री ने कहा कि प्रभु ऋषभदेव सहित 19 तीर्थंकरों ने भी उत्कृष्ट गृहस्थ धर्म का पालन किया था। वैराग्य तो बाद में धारण किया। श्रावक से श्रमण बनने के लिए मन में वैराग्य की ज्योति जलाओ। स्वामी विवेकानंद ने जैन धर्म के बारे में कहा था जैन धर्म एक हीरा है। जैन धर्म में व्यवस्थाओं की कमी नहीं है। यह ज्वैलर्स की अपेक्षा कोयला बेचने वाले के हाथ लग गया है। श्रमण न बन सको तो कोई बात नहीं। कम से कम एक सच्चा श्रावक बन जाना।जिनेंद्र देव ने कहा है सिर्फ...