एटा, अगस्त 13 -- Etah News: पुरानी बस्ती स्थित दिगंबर जैन बड़े मंदिर में संत आचार्य नयन सागर महाराज ने श्रावकों को बताया कि कुछ क्रियाएं परंपरागत होती हैं। आर्ष और आगम परंपरा वह परंपरा हैं जो हमारे गुरुओं ने हमें दीं हैं। यह सम्यक परंपराएं हैं। प्लास्टिक और कांच के मोती की माला से जाप करना व्यर्थ है। कांच और प्लास्टिक सर्वथा अशुद्ध ही होते हैं। प्रत्येक कार्य में भावों की विशुद्धि नितांत आवश्यक है। आचार्यश्री ने कहा कि श्रावक का अर्थ श्रद्धावान, विवेकवान और क्रियावान है। श्रद्धा के बिना की गई कोई भी क्रिया फल देने में सफल नहीं होगी। बुजुर्ग जो परंपरा हमारे लिए बनाकर गए हैं। वह क्रियाएं मानने योग्य हैं। जिस तरह सती मैना सुंदरी ने श्रद्धा विश्वास के साथ सिद्ध चक्र विधान से अपने पति के साथ-साथ 700 कुष्ठ रोगियों का भी रोग दूर कर दिया था। उसके...