एटा, सितम्बर 1 -- Etah News: चौबीस दिवसीय तीर्थंकर्र विधान में मंगलकारी तीर्थंकर भगवान वासु पूज्य स्वामी विधान, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट मंगलवार को बड़े जैन मंदिर में किया गया। आचार्य नयन सागर महाराज ने श्रावकों को बताया कि सबसे पहले धरती पर नाभिराय के पुत्र प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव हुए। भरत चक्रवर्ती ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र हैं। प्रथम चक्रवर्ती के रूप में जाने जाते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि भरत कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। वह षट्खंड के अधिपति हैं। भारतवर्ष का नाम इन्हीं भरत चक्रवर्ती के नाम से ही पड़ा है। जिस देश के राजा ऋषभदेव अधिनायक हो उस घर में उनके दोनों पुत्र योद्धा पिता के दाएं बाएं हाथ थे। यह भी पढ़ें- घर-घर में रावण बैठा है, इतने राम कहां से लाओगे : नयन सागर महाराज जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के पूजन, ध्यान से अ...