नई दिल्ली, फरवरी 26 -- फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष एकादशी को रंगभरी या आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी का बहुत अधिक महत्व है, क्योंकि इसमें भगवानविष्णु के साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। दोनों की पूजा का सौभाग्य इस एकादशी में मिलता है। इस एकादशी को रंगभरी एकादशी इसलिए कहते हैं,क्योंकि इस दिन शिव गौना कराकर गौरा मां को पहली बार ससुराल के तौर पर काशी में लाए थे। वहां उनका स्वागत किया गया और उन पर गुलाल लगाया । तभी से बनारस में रंगभरी एकादशी बनाई जाती है। इस दिन श्री हरि यानि भगवान विष्णु, शंकर और मां पार्वती का व्रत रख पूजन करने का विधान है। इस साल रंगभरी एकादशी 27 फरवरी यानी कल शुक्रवार को मनाई जाएगी।उदयातिथि में कब है एकादशी तिथि पुराणों में एकादशी तिथि उस दिन श्रेष्ठ मानी जाती है, जिस दिन उसमें द्वादशी लग रही हो या फिर त्रयोदशी ...