नई दिल्ली, अक्टूबर 19 -- Dussehra: दशहरा आते ही देशभर में रावण दहन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। जगह-जगह रामलीला का मंचन होता है और विजयादशमी पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर में दशहरे की परंपरा बिल्कुल अलग है। यहां दशहरा एक-दो दिन नहीं, बल्कि करीब 75 दिनों तक मनाया जाता है। खास बात यह है कि इस दौरान रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। यहां का दशहरा भगवान राम और रावण की कथा के बजाय मां दंतेश्वरी की पूजा और आदिवासी परंपराओं से जुड़ा है।करीब 600 साल पुरानी है परंपरा बस्तर के दशहरे का इतिहास करीब 600 साल पुराना माना जाता है। इसकी शुरुआत 15वीं सदी में बस्तर के राजा पुरुषोत्तम देव के शासनकाल से जोड़ी जाती है। जगदलपुर में होने वाला यह आयोजन अपनी अनूठी परंपराओं के लिए देशभर में जाना जाता है। आमतौर पर दशहरे...