Dumka News: मां की याद में उपन्यासकार नीलोत्पल मृणाल ने गाया छठ गीत, सुनने वालों की आंखें हुईं नम
दुमका, नवम्बर 7 -- Dumka News: छठ महापर्व पर घाटों की रौनक और घर-आंगन में उत्सव के बीच मां की कमी का दर्द कितना गहरा होता है, इसे लोकगायक और लोकप्रिय उपन्यासकार नीलोत्पल मृणाल ने अपने नए गीत 'घर से छुटल छठ' में बयां किया है। यूट्यूब पर रिलीज होते ही यह गीत श्रोताओं को भावुक कर रहा है। लोकगायक और लोकप्रिय उपन्यासकार नीलोत्पल मृणाल की मां हर वर्ष नोनीहाट स्थित उनके पैतृक घर में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ छठ व्रत करती थीं। हाल ही में मां के निधन के बाद इस बार घर में छठ की वही रौनक नहीं होगी। इसी व्यक्तिगत पीड़ा और मां की स्मृतियों को उन्होंने गीत का रूप दिया है। गीत की पंक्तियां 'अंगना में तुलसी के चौरा उदास बांटे, दुगो रोटी दाल खातिर लोग बनवास काटे, माई तो आंखिया गावे बरसात काटे...' मां के बिना सूने घर और बिछोह का दर्द बयां करती हैं।
गी...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.