हेमलता कौशिक, अप्रैल 10 -- दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सुनाए एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि केवल किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार करना अपने आप में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण (SC-ST एट्रोसिटी) कानून के तहत अपराध नहीं बनता। इसके लिए यह साबित होना आवश्यक है कि आरोपी ने जाति के आधार पर अपमान करने की मंशा से कार्य किया हो। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा कि एससी/एसटी कानून की धारा 3 के तहत अपराध तभी बनता है जब यह स्पष्ट हो कि कथित कृत्य पीड़ित को उसकी जाति के कारण अपमानित करने की मंशा से किया गया हो। केवल यह पर्याप्त नहीं है कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति से है और उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ है। यह भी पढ़ें- 'गले की नस पर हल्का दबाव भी जानलेवा हो सकता है'; CM पर हमले के मामले में बोला HCदो मह...