धनबाद, जुलाई 22 -- Dhanbad News: साबलपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को भागवत मर्मज्ञ सुरेन्द्र हरिदास ने वामन भगवान और राजा बलि का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राजा बलि एक अत्यंत शक्तिशाली और दानी असुर राजा थे। उन्होंने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। उनके अहंकार को समाप्त करने और देवताओं के कल्याण के लिए भगवान विष्णु ने वामन रूप में अवतार लिया। वामन भगवान एक छोटे से ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे और उनसे केवल तीन पग भूमि का दान मांगकर उनके अंहकार को खत्म किया। कथा व्यास श्री हरिदास ने कहा कि यह प्रसंग हमें यह सिखाता है कि अहंकार का अंत निश्चित है और सच्ची भक्ति, दान और सत्य ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा दिलाते हैं। श्री हरिदास ने कहा कि हमें पीर पर चादर नहीं, महावीर पर सिंदूर चढ़ाना चाहिए। हम...