देहरादून, अक्टूबर 24 -- Dehradun News: देहरादून। प्रमुख संवाददाता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की वास्तविक सफलता मानव बुद्धिमत्ता का विकल्प बनने में नहीं, बल्कि उसे सशक्त बनाने में है। एआई सूचनाओं का विश्लेषण और पैटर्न पहचानने में सक्षम है, लेकिन मानवीय संवेदनाएं, नैतिक विवेक और सामाजिक परिस्थितियों की समझ तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण हैं। यह बात ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ऑटो-कॉम 2026 के समापन सत्र में विशेषज्ञों ने कही।

मानव बुद्धिमत्ता और एआई का समन्वय तीन दिवसीय सम्मेलन में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर डॉ. डीके लोबियाल ने कहा कि मानव की रचनात्मकता और एआई की विश्लेषणात्मक क्षमता का समन्वय तकनीकी विकास को अधिक प्रभावी और समाजोपयोगी बना सकता है। मशीनों की क्षमताओं और मानव बुद्धिमत्ता को...