दरभंगा, नवम्बर 3 -- Darbhanga News: राजीव रंजन झा,दरभंगा। भारतीय ज्ञान परंपरा केवल किताबी या बौद्धिक ज्ञान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, ब्रह्मांड और मानव जीवन के बीच एक गहरा संतुलन स्थापित करती है। प्राचीन भारतीय ऋषियों, विचारकों और वैज्ञानिकों ने प्रकृति के नियमों का गहरा अध्ययन किया, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण हमारा ऋतुचक्र है जो हमें यह सिखाता है कि मौसम के अनुसार अपने खान-पान, आचरण और जीवनशैली को कैसे ढाला जाए। लनामिवि के संस्कृत विभाग में मंगलवार को आयोजित सेमिनार में भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. टुनटुन झा अचल ने उक्त बातें कही। भारतीय ज्ञान परंपरा और मौसम विज्ञान विषय पर आयोजित सेमिनार में प्रो. अचल ने कहा कि वेदों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, वेदांग ज्योतिष में काल गणना, बृहत्संहिता में मौसम एवं वर्षा संबंधी वि...