चंदौली, अक्टूबर 13 -- Chandauli News: धानापुर, हिन्दुस्तान संवाद। दशहरा सबके लिए एक ही त्योहार है, लेकिन इसे मनाने का तरीका पीढ़ी दर पीढ़ी बदलता गया। दादा-दादी के लिए दशहरा मेला, रामलीला, दोस्तों के साथ घूमने और सालभर इंतजार के बाद मिलने वाली खुशियों का नाम था। माता-पिता की पीढ़ी के लिए यह परंपरा और परिवार को एक साथ जोड़ने का अवसर रहा। आज भी कुछ लोग परंपरागत तरीके से रामलीला में अपनी भूमिका निभा रहे हैं मगर वहीं आज की पीढ़ी खासकर बच्चों के लिए दशहरा पर्व मनोरंजन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन दुनिया और नई पसंद-नापसंद से जुड़ गया है। इस तरह दशहरा मनाने का तरीका बदलने के साथ ही त्योहार से जुड़ीं हमारी भावनाएं भी धीरे-धीरे बदल रही हैं। धानापुर कस्बा निवासी 67 वर्षीय पं. सनत कुमार द्विवेदी कहते हैं कि उनके बचपन में दशहरा का त्योहार राम के चरित्र के अनुसर...