नई दिल्ली, जनवरी 19 -- चाणक्य कहते हैं कि हर दुश्मन एक जैसा नहीं होता। उसकी शक्ति, स्वभाव और स्थिति के अनुसार ही रणनीति बदलनी चाहिए। चाणक्य नीति में एक बहुत प्रसिद्ध श्लोक है, जो दुश्मन से निपटने का सबसे व्यावहारिक और बुद्धिमान तरीका बताता है: अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमेन दुर्जनम्। आत्मतुल्यबलं शत्रु: विनयेन बलेन वा।। इस श्लोक का भावार्थ है -बलवान दुश्मन को अनुलोम यानी सीधे, सहयोग या रणनीति से हराएं।दुर्जन यानी छोटे-मोटे, चालबाज दुश्मन को प्रतिलोम (उल्टा या चालाकी) से हराएं।जो दुश्मन आपकी बराबरी का हो, उसे विनय (शांति, विनम्रता) से या बल से हराएं। शत्रु की कुंडली यानी उसकी कमजोरियां, ताकत, मंशा खंगालना, शांति से काम लेना और अपनी योजनाओं को जगजाहिर नहीं करना - ये तीन बातें इस श्लोक में छिपी हुई हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस नीति से दुश्...
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