नई दिल्ली, मार्च 23 -- चैत्र नवरात्रि 2026 में देशभर के मंदिरों में माता दुर्गा की आराधना जोर-शोर से चल रही है। इस पवित्र समय में भक्त शक्तिपीठ और सिद्धपीठों में विशेष रूप से दर्शन करने जाते हैं। अक्सर लोग शक्तिपीठ और सिद्धपीठ को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में इनके बीच स्पष्ट अंतर है। शक्तिपीठ माता सती की पौराणिक कथा से जुड़े हैं, जबकि सिद्धपीठ साधना और सिद्धि के परिणामस्वरूप प्रसिद्ध हुए हैं। नवरात्रि में दोनों स्थलों पर भक्तों की आस्था चरम पर होती है और मां दुर्गा की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए विस्तार से समझते हैं इन दोनों का अर्थ, उत्पत्ति और महत्व।शक्तिपीठ क्या हैं? शक्तिपीठ वे पवित्र स्थल हैं, जहां माता सती के शरीर के अंग गिरे थे। पुराणों के अनुसार, जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में आत्मदाह किया, तो ...