नई दिल्ली, मार्च 22 -- चैत्र नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित होते हैं। इनमें चौथा दिन मां कूष्मांडा की पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है। मां कूष्मांडा सृष्टि की आदि शक्ति हैं, जिनकी आराधना से रोग, शोक और कष्ट दूर होते हैं तथा आयु, यश, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखकर विधि-पूर्वक पूजा करने से मां जल्द प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। आइए जानते हैं मां कूष्मांडा के स्वरूप, कथा, पूजा विधि, मंत्र और आरती के बारे में विस्तार से।मां कूष्मांडा का स्वरूप और महत्व मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि इनके आठ हाथ हैं। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला सुशोभित होती हैं। इनका वाहन सिंह है और कुम्हड़ा (कद्दू) इनका प्रिय भो...