नई दिल्ली, मार्च 17 -- नवरात्र का पर्व नैसर्गिक पवित्रता और बाल-सुभाव के आवाहन का पर्व है। यह आवाहन जितना सुरुचि से, जितना सादगी से, जितना प्रकृति के साथ संतुलन बुद्धि रखते हुए किया जाए, जितने बाल-सुलभ भाव से, सरल-निश्छल मन से किया जाए, उतनी ही जगदंबा प्रसन्न होती हैं। नवरात्र का संदेश नव सृष्टि का संदेश है। वर्ष में दो नवरात्र पड़ते हैं- शारदीय और वासंती। चैत्र नवरात्र इस साल 19 से शुरू होंगे और 27 मार्च 2026 को खत्म होंगे । दोनों संपातों में पड़ते हैं। संपात का अर्थ होता है- स्थूल रूप में रात-दिन का बराबर होना। पृथ्वी का सूर्य से सम दूरी होना। सूक्ष्म रूप से इसका अभिप्राय है- संतुलन प्राप्त करने की स्थिति। ताप और शीत के बीच संतुलन होता है। नवरात्र में जगदंबा की पूजा का विधान इसलिए है कि व्यक्ति की अपनी कोई ऊर्जा है, इसका अभिमान छोड़ने क...
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