Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में इन मंत्रों का करें जाप, जानिए सही तरीका
नई दिल्ली, मार्च 20 -- चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। यह स्वरूप शांति, साहस और वीरता का अद्भुत संगम है। मां का मस्तक अर्धचंद्र से सुशोभित है, जिसके कारण इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। सिंह पर सवार मां की दस भुजाएं हैं, जिनमें खड्ग, त्रिशूल, गदा, धनुष, बाण, कमंडलु, माला, वर मुद्रा, अभय मुद्रा और खप्पर शोभित हैं। इनकी पूजा से भय, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा बौद्धिक क्षमता, आत्मविश्वास और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं तीसरे दिन की पूजा विधि और शक्तिशाली मंत्र।मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व मां चंद्रघंटा का रूप सौम्य और भयंकर दोनों है। सिंह पर सवार होने से वे दुष्टों का संहार करने में तत्पर रहती हैं, वहीं अर्धचंद्र से सुशोभित मस्तक शांति और शीतलता का प्रतीक ह...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.