नई दिल्ली, मार्च 15 -- चैत्र अमावस्या हिंदू पंचांग में कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है, जिसे भारत के कई हिस्सों में 'भूतड़ी अमावस्या' या 'दार्श अमावस्या' भी कहा जाता है। यह हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि से ठीक पहले आती है। इस दिन पितृ तर्पण, स्नान-दान और विशेष अनुष्ठान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। पितृ दोष से पीड़ित लोगों के लिए यह तिथि विशेष रूप से फलदायी है। 2026 में चैत्र अमावस्या 18 मार्च को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं पितृ दोष मुक्ति के 5 प्रभावी उपाय, जो सरल हैं और घर पर ही किए जा सकते हैं।चैत्र अमावस्या 2026 की तिथि वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण अमावस्या तिथि 18 मार्च 2026, दिन - बुधवार को सुबह 8:25 बजे शुरू होगी और 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी। मुख्य अनुष्ठान 18 मार्च को ही किए जाएं...
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