बिजनौर, सितम्बर 25 -- Bijnor News: श्री सरजयती दिगंबर जैन मंदिर एवं श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में जैन धर्म के दशलक्षण पर्व के 10वें एवं समापन दिवस को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के रूप में मनाया गया। शास्त्री राजा ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का अर्थ समझाते हुए कहा कि वचन और शरीर की पवित्रता ही सच्चा ब्रह्मचर्य है। अपनी वासनाओं, इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए आत्मा के स्वरूप में लीन होना तथा संसार के विकारों से दूर रहना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। पर्व के समापन अवसर पर वेदी पर सामूहिक अभिषेक किया गया। भगवान शांतिनाथ पर शांतिधारा अनुप जैन एवं मीनाक्षी जैन परिवार की ओर से की गई। यह भी पढ़ें- Shamli News: दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना इसके बाद भगवान चंद्रप्रभु, भगवान नमिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, श्री रत्नत्रय, ...