बिजनौर, सितम्बर 24 -- Bijnor News: श्री दिगंबर जैन मंदिर में 10 लक्षण पर्व के मौके पर चल रहे पूर्वजों के आठवें दिन पंडित जी ने अपने प्रवचन करते हुए आखिर जैन धर्म को सर्वोपरि बताया उन्होंने कहा कि आकिंचन का मतलब है। कुछ भी मेरा नहीं है। आकिंचन शब्द का अर्थ: यह भी पढ़ें- Bijnor News: दशलक्षण पर्व: ममत्व के परित्याग को कहते हैं आकिंचन आकिंचन का अर्थ आ = नहीं, किंचन = कुछ भी। यह भी पढ़ें- Bijnor News: दशलक्षण पर्व: ममत्व के परित्याग को कहते हैं आकिंचन अर्थात मेरे पास अपना कहने को कुछ भी नहीं है। जैन धर्म के अनुसार हम दो तरह की चीजों को अपना मानते हैं, इसमें पहला है 'बाहर का परिग्रह' जिसमें घर, पैसा, गाड़ी, कपड़े, परिवार आदि आते हैं और दूसरा 'अंदर का परिग्रह' जिसमें क्रोध, मान, माया, लोभ, गलत सोच आदि आते हैं। कहा कि ज्ञानी कहते हैं कि जब शरीर ...