नई दिल्ली, मई 8 -- श्रीमद्भागवत गीता सनातन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जीवन जीने का पूरा दर्शन दिया। गीता में भगवान कृष्ण ने मनुष्य को सुखी और शांतिपूर्ण जीवन जीने का मार्ग बताया है। उन्होंने बताया कि कुछ ऐसी बुरी आदतें हैं, जो इंसान को जीवनकाल में ही नरक भोगने पर मजबूर कर देती हैं। ये तीनों नरक के द्वार हैं, जिनसे बचकर इंसान सुखी और सफल जीवन जी सकता है।त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत।।(भगवद्गीता, अध्याय 16, श्लोक 21) भगवान कृष्ण कहते हैं कि काम, क्रोध और लोभ - ये तीन नरक के द्वार हैं, जो आत्मा का विनाश करते हैं। इन तीनों से दूर रहना ही सुखी जीवन का सबसे बड़ा रहस्य है।काम (वासना) - पहला नरक का द्वार काम या वासना इंसान को भौतिक सुखों में इस कदर फंसा...