भागलपुर, जुलाई 3 -- Bhagalpur News: भागलपुर, मुख्य संवाददाता। भागलपुर के पशुपालक देसी नस्ल की ओर लौटने लगे हैं। पशु पालने वाले अब फ्रोजेन शुक्र द्वारा अपने मवेशियों का कृत्रिम गर्भाधान (एआई) करा रहे हैं। कृत्रिम गर्भाधान एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मादा जानवर के प्रजनन मार्ग में बिना प्राकृतिक यौन संबंध के शुक्राणु डाले जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था की संभावना को बढ़ाना या पशुओं में उत्तम नस्ल का विकास करना होता है। पशुपालन विभाग, भागलपुर की रिपोर्ट में बताया गया कि देसी नस्ल की गिर, साहीवाल और थारपारकर का 1,458 एआई हुआ है।

संकर नस्ल की मांगभागलपुर के पशुपालक अब विदेशी नस्ल के ब्रीड से तौबा कर रहे हैं। अब तक एक भी किसान ने विदेशी नस्ल (होलस्टीन-फ्रीजियन, जर्सी और ब्राउन स्विस) से एआई नहीं कराया। संकर नस्ल अभी भी मांग में है। अब...