भागलपुर, अगस्त 5 -- Bhagalpur News: किशनगंज। वरीय संवाददाता किसी भी गंभीर मरीज के लिए जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी कई बार किलोमीटर में नहीं, बल्कि कुछ मिनटों में तय होती है। सड़क दुर्घटना, हृदयाघात, मस्तिष्काघात, अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण, श्वसन विफलता या प्रसव के दौरान अचानक उत्पन्न जटिलताओं में उपचार का पहला घंटा जिसे चिकित्सा विज्ञान 'गोल्डन ऑवर' कह जाता है सबसे निर्णायक होता है। यदि इस अवधि में मरीज को वेंटिलेटर सहायता, प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम और गहन निगरानी उपलब्ध हो जाए तो उसके बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन लंबे समय तक किशनगंज में आईसीयू सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ता था। रेफरल की प्रक्रिया में उपचार का सबसे महत्वपूर्ण समय बीत जाता था और कई परिवार...