बस्ती, अगस्त 14 -- Basti News: बस्ती। पति की शहादत का दर्द किसी भी परिवार को भीतर तक तोड़ सकता है, लेकिन निर्मला यादव ने इस पीड़ा को देशसेवा के संकल्प में बदल दिया। कारगिल युद्ध के एक साल बाद बारूदी सुरंग विस्फोट में पति मुन्नाराम यादव की शहादत के बाद उन्होंने न केवल परिवार को संभाला, बल्कि बड़े बेटे अमित यादव को भी 2010 में सेना में भेज दिया। आज अमित जम्मू-कश्मीर में इंजीनियरिंग कोर में नायक के पद पर देश की सेवा कर रहे हैं। पति को याद करते हुए निर्मला की आंखें नम हो जाती हैं, लेकिन शहीद की पत्नी होने का गर्व उनके चेहरे पर साफ नजर आता है। निर्मला का मायका पचवस गांव में है, जिसे सैनिकों के गांव के रूप में भी जाना जाता है। उनके पिता भी सेना में थे। सैनिकों के बीच पली-बढ़ीं निर्मला के मन में बचपन से ही देश और सैनिकों के प्रति सम्मान रहा। पति...