बांदा, अगस्त 9 -- Banda News: बांदा। जनपद में प्राइवेट हों या रोडवेज बसें चाहे जितनी खटारा हों, फिटनेस टेस्ट में आसानी से पास हैं। इन दिनों शहर के बबेरू, बिसंडा,फतेहपुर,अतर्रा व नरैनी मार्गों पर ऐसी दर्जनों बसें यात्रियों की जान जोखिम में डालकर फर्राटे भर रही हैं। किसी में शीशे नहीं हैं तो किसी में ब्रेक व स्टेयरिंग तक सही ढंग से काम नहीं करती हैं। परिवहन विभाग के अधिकारी जांच अभियान चलाते हैं, पर ऐसी खतरनाक बसों को नजरंदाज कर दिया जाता है। जल्द घर पहुंचने के चक्कर में यात्री भी इन खटारा बसों में सवार होकर सफर करते हैं। वाहन फिटनेस जांच को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए शासन ने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) व वीडियो रिकॉर्डिंग के नियम बनाए हैं। नए व्यावसायिक वाहनों को पंजीकरण के बाद आठ साल तक हर दो साल पर और उसके बाद हर साल फिटनेस करानी...