नई दिल्ली, मई 26 -- Bakrid Kab hai: ईद अल अजहा को भारतीय उपमहाद्वीप में बकरा ईद और बड़ी ईद भी कहा जाता है। यह मूलतः बालिगों का त्योहार है, क्योंकि इसकी सभी रस्में-रिवायतें घर के बड़े अर्थात जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा ही पूरी की जाती हैं। इस साल 28 मई को बकरीद मनाई जाएगी। हज का फर्ज कई नियमों में बंधा होता है, इसलिए कुर्बानी पर भी कई बंदिशें आयद हो जाती है। पहला नियम हज और कुर्बानी पर यह लागू होता है कि पैसा अपनी हलाल की कमाई का हो। इसमें उधार लेन-देन का कोई नियम नहीं है। आपको हज और कुर्बानी अपनी मेहनत की कमाई में करनी है। पहले आपको अपने लालचीपन तथा बेईमानी के स्वभाव की कुर्बानी देनी होगी, तभी आपकी कुर्बानी और हज कुबूल किया जाएगा। हज और कुर्बानी में उधारी नहीं चलती, इसलिए प्रत्येक मुस्लिम न हज कर पाता है और न ही कुर्बानी, लेकिन हज का पर्व और...