बहराइच, जुलाई 23 -- Bahraich News: बौंडी, संवाददाता। बौंडी में अमरचंद रस्तोगी के आवास पर चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन गोपाल शरण जी महाराज ने धुंधकारी की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में तुंगभद्रा नदी के किनारे एक नगर था। वहां आत्मदेव नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी धुन्धुली के साथ रहते थे। आत्मदेव अपने कार्य में निपुण थे, पर धुन्धुली झगड़ालू स्वभाव की थी। घर में सब कुछ था पर वे निसंतान थे, इसलिए आत्मदेव दुखी रहते थे। एक दिन वे घर से निकल कर वन में गए और वहां एक संन्यासी से मिले। आत्मदेव ने संन्यासी से रोते हुए अपना दुख सुनाया। संन्यासी ने उन्हें एक फल देकर कहा इसे अपनी पत्नी को खिला देना। अगर वह एक साल तक सत्य, शौच, दया, दान, और एक समय ही भोजन करने के नियम का पालन करेगी तो पुत्र प्राप्ति हो जाएगी। ब्राह्मण फल लेकर घर गए और अपनी पत्...