वाराणसी, मार्च 25 -- शक्ति के गौरी स्वरूप की आराधना को समर्पित वासंतिक नवरात्र पर देवी का पूजन-अर्चन घर-घर होता है। अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व है। दोनों तिथियों पर भक्तगण परिवार की परंपरा और मान्यता के अनुरूप कन्या पूजन करते हैं। शास्त्रों में स्पष्ट है कि दो से 10 वर्ष आयु तक की कन्याओं का पूजन करना चाहिए। प्रत्येक वय की कन्या देवी के स्वरूप विशेष की प्रतिनिधित्व होती है। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री ने बताया कि नवरात्र में कन्या पूजा को अत्यंत शुभ और विशिष्ट फलदायी माना गया है। कन्या पूजन से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उनके चरण धोकर आसन दिया जाता है। तिलक करके भोग अर्पित किया जाता है। अंत में दक्षिणा एवं अन्य उपहार भेंट कर उनकी विदाई की जाती है। दो से कम और 10 वर्ष से अधिक वय की कन्या का पूजन नहीं करना चाहिए।...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.