अररिया, नवम्बर 3 -- Araria News: फुलेन्द्र कुमार मल्लिक अररिया, वरीय संवाददाता यह भी पढ़ें- Kishanganj News: 154 साल से आस्था का केंद्र है बालुबाड़ी काली मंदिर काली पूजा, काली मेला और कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु के बीच अटूट सांस्कृतिक संबंध रहा है। महान कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु की रचनाओं में सीमांचल के मेलों, त्योहारों और लोक-उत्सवों का काफी सजीव चित्रण देखने व पढ़ने को मिलता है। रेणु की कालजयी कृति 'तीसरी कसम' की पूरी पृष्ठभूमि ही 'फारबिसगंज के काली मेले' और मेलों में होने वाली नौटंकी के ईद-गिर्द बुनी गई है। हीरामन की गाड़ी पर लदी नौटंकी की नर्तकी 'हीराबाई' और ग्रामीण संस्कृति का अंतर्विरोध इसी मेले की देन है। नागार्जुन पुरस्कार से सम्मानित बड़े साहित्यकारों मे शुमार 92 वर्षीय भोला पंडित प्रणयी कहते हैं फणीश्वर नाथ रेणु के प्रसिद्ध उपन्यासों ज...