अमरोहा, अक्टूबर 17 -- प्रहलाद और हिरणाकश्यप की कथा का वर्णन Amroha News: क्षेत्र के गांव हथियाखेड़ा के शिव मंदिर पर चल रही साथ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक सुरेंद्र सिंह भारद्वाज के द्वारा भक्त प्रहलाद व हिरणाकश्यप की कथा का वर्णन किया गया। कथावाचक ने कहा कि हिरणाकश्यप दैत्य ने घोर तप किया। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए कहा कि मांगों जो मांगना है। यह सुनकर हिरणा कश्यप ने अपनी आंखें खोली और ब्रह्मा जी को अपने समक्ष खड़ा देख प्रभु मुझे केवल वही वरदान चाहिए कि मैं न दिन में मरूं, न रात को, न अंदर, न बाहर, न कोई हथियार काट सके, न आग जला सके, न ही में पानी में डूब कर मरूं, सदैव जीवित रहूं । ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दिया। हिरणाकश्यप के पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरणाकश्यप भगवान विष्णु को शत्रु मानते थे...