अमरोहा, सितम्बर 19 -- Amroha News: जैन मंदिर कोट में चल रहे दशलक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म के बारे में जानकारी दी गई। सुबह जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। सायंकालीन आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। यह भी पढ़ें- दस लक्षण पर्व के चौथे दिन जैन मंदिरों में किया गया अभिषेक-संशोधित फाइल उठाएंउत्तम शौच धर्म पर प्रवचन सांगानेर से आए शास्त्री सौरभ जैन ने उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि शौच शब्द का अर्थ केवल शरीर, वस्त्र या वातावरण की बाह्य स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक और आध्यात्मिक अर्थ आत्मा की आंतरिक पवित्रता और निर्मलता है। आचार्यों ने स्पष्ट कहा है कि आत्मा का सबसे बड़ा मल 'लोभ' है, और इस लोभ रूपी कचरे को अपनी चेतना से पूर्णतः बाहर निकाल फेंकना ही वास्तव में उत्तम शौच धर्म है। हमारे जीवन में दुख...