Aligarh News: जहां कुछ भी मेरा नहीं, वहीं प्रकट होता है उत्तम आकिंचन्य धर्म
अलीगढ़, सितम्बर 25 -- Aligarh News: अलीगढ़, कार्यालय संवाददाता। दसलक्षण महापर्व के नौवें दिन गुरुवार को उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। खिरनी गेट स्थित श्री लख्मीचंद पांड्या खंडेलवाल दिगंबर जैन मंदिर में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं सामूहिक पूजन हुआ।कार्यक्रम उपाध्याय मुनि शिवदत्त सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य राकेश भैया के निर्देशन में हुआ। मुनि शिवदत्त सागर महाराज ने कहा कि जब मनुष्य को यह अहसास होने लगता है कि यहां वास्तव में कुछ भी मेरा नहीं है, तभी उत्तम आकिंचन्य धर्म प्रकट होता है। आकिंचन्य धर्म का अर्थ अपरिग्रह और अनासक्ति है। अनावश्यक भौतिक वस्तुओं, मोह-माया और सांसारिक आसक्तियों का त्याग ही आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। यह भी पढ़ें- Etah News: तोड़ना नहीं त्याग करना सीख...
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