नई दिल्ली, मई 19 -- जिस चंद्र मास में संक्रांति नहीं होती, उसे अधिमास या मलमास कहते हैं। हर तीन वर्ष पश्चात आने वाले इस मास को पुरुषोत्तम मास (17 मई से 15 जून) भी कहा जाता है। ब्रह्मा द्वारा रचित प्रकृति के नियमानुसार बारह माह थे। दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने अमर होने के लिए ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और उसने उनसे अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा ने अमर होने का वरदान देने की जगह दूसरा वरदान मांगने को कहा। तब हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा से कहा कि उनके बनाए प्राणी- सुर-असुर, पशु-पक्षी और मनुष्य उसे न मार पाएं। वह न दिन में मरे, न रात में। न घर के भीतर मरे, न घर के बाहर। न पृथ्वी पर मरे, न आकाश में। वह न किसी युद्ध में अस्त्र से मरे, न किसी शस्त्र से। न बारह मास में से किसी मास में मरे। वह पूरे ब्रह्मांड का एकछत्र राजा कहलाए। ब्रह्मा ने उसे उसका ...