नई दिल्ली, मार्च 27 -- जब हम बहुत परेशान होते हैं और सही गलत का कुछ भी हमें समझ नहीं आता तो ऐसे में सही गलत की पहचान कैसे करें, इसमें कैसे अंतर करें, यह हमारे लिए जानना बहुत जरूरी होता है। यहां हम आपको रामचरितमानस के कुछ ऐसे श्लोक बताएंगे, जहां से आप समझेंगे कि संत, असंत लोग कैसे होते हैं और इनकी पहचान कैसे करें।द संत असज्जनन चरना । दुखप्रद उभय बीच कछु बरना॥बिछरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं॥ अब मैं संत और असंत दोनों के चरणों की वन्दना करता हूं, इस दुनिया में आपको दोनों मिलेंगें, लेकिन आप उनको कैसे पहचानेंगे। उनमें कुछ अन्तर कहा गया है। वह अंतर यह है कि एकतो बिछुड़ते समय प्राण हर लेते हैं और दूसरा मिलते हैं तब दारुण दुःख देते हैं। यानी संत जब आपसे दूर जाते हैं, तो आपके लिए प्राण जाने के समान हैं, और असंत जब आपके सामने आते ह...