खंडवा, मार्च 3 -- आजादी के बाद 1947 में हुए देश विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आए सिंधी समाज के साथ एक खास परंपरा भी आई- 'सिंधी घियर' की मिठास। 79 वर्षों बाद भी यह खास मिठाई होली के त्योहार पर घर-घर में बनती और बांटी जाती है। समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन इस मिठाई का स्वाद और परंपरा आज भी वैसी ही कायम है।बहन-बेटियों, रिश्तेदारों को भेजते हैं मिठाई मध्य प्रदेश के खंडवा शहर की सिंधी कॉलोनी और सिंधी बाजार में होली से एक सप्ताह पहले ही दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगती है। लोग बड़ी मात्रा में घियर खरीदकर बहन-बेटियों और रिश्तेदारों को भेजते हैं। खास बात यह है कि यह मिठाई सिर्फ होली के मौके पर ही बनाई जाती है। सिंधी समाज के हजारों परिवार इसे परंपरा के रूप में निभाते आ रहे हैं। अब अन्य समाज के लोग भी इसकी खुशबू और स्वाद के दीवाने हो रहे हैं। यह भ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.