गाजियाबाद, मार्च 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा को मरने की अनुमति (पैसिव इच्छामृत्यु) दे दी है। वो करीब 13 सालों से मशीनों के सहारे जिंदा हैं। इसके बाद से एक बार फिर मरने का अधिकार (Right to Die) की बहस शुरू हो गई है। भारत में ये बहस सबसे पहले अरुणा शानबाग मामले में शुरू हुई थी।सफाईकर्मी ने नर्स से की थी हैवानियत अरुणा मुंबई के KEM अस्पताल में एक नर्स थीं। 27 नवंबर 1973 को वो अपनी ड्यूटी खत्म करके घर लौट रही थीं। लेकिन तभी अस्पताल के सफाईकर्मी सोहनलाल वाल्मीकि ने उन पर हमला कर दिया। सोहनलाल के ऊपर हैवानियत का भूत सवार था। उसने कुत्ते की चेन से अरुणा का गला घोंटा और उनका रेप किया। यह भी पढ़ें- बेटे के लिए क्यों मांगनी पड़ी इच्छा मृत्यु, हरीश राणा के पिता ने रोते हुए बतायाजिंदा लाश बन गईं थीं अरुणा हमला इतना घातक था कि उनके द...