गिरडीह, जून 17 -- आशीष कुमार मंटू रेम्बा, प्रतिनिधि। कभी क्षेत्र के धार्मिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक व्यवस्था का केंद्र बिंदु रहे जमुआ प्रखंड के रेम्बा में स्थित ऐतिहासिक मठ अब बदहाली के अंतिम पायदान पर खड़ा है। अपने भग्नावशेष पर चार-चार आंसू बहाते रेम्बा मठ को एक ऐसे तारणहार की तलाश है जो उसके परिसंपत्तियों को संरक्षित रख सके।

मठ की संपत्ति पर खतरा अपने 400 वर्ष पुराने इतिहास को समेटे रेम्बा मठ के पास आज भी करीब 100 करोड़ रुपए की संपत्ति बची हुई है लेकिन कतिपय लोग उक्त परिसंपत्तियों पर अपनी गिद्ध दृष्टि बनाए हुए हैं। लोगों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो समस्त कीमती जमीन भी लूट का भेंट चढ़ जाएगी। आज भी मठ के पास एक दर्जन तालाब तथा कई एकड़ कृषि योग्य भूमि है। प्रबंधन के अभाव में बंटाई पर खेती करने वाले कथित फर्जी कागजात के सह...