प्रयागराज, मई 25 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार दशक पुराने एक दीवानी मामले में बार-बार झूठा रुख अपनाने, अदालत को गुमराह करने और तथ्यों को छिपाकर स्थगन आदेश हासिल करने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने याचियों के आचरण की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उनकी याचिका को न सिर्फ खारिज कर दिया, बल्कि उनके आचरण की कीमत बताने के लिए हर्जाना भी लगाया है।

मामले का विवरण यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने सहारनपुर जिले के देवबंद तहसील के नंदहेड़ा खुर्द गांव की एक जमीन से जुड़े मामले में दिया है। तारा चंद व अन्य की याचिका के तथ्यों के अनुसार विपक्षी ने याचियों के पिता के खिलाफ आठ हजार रुपये की वसूली के लिए वर्ष 1984 में दीवानी मुकदमा किया था। एक जनवरी 1985 को अदालत ने याचियों के पिता के खिलाफ एकपक्षीय डिक्री पारित करते हुए ...