नई दिल्ली, जुलाई 28 -- दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) द्वारा चार वर्षीय स्नातक (एफवाईयूपी) पूरा करने वाले छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश देने के फैसले पर शिक्षकों के बीच मतभेद उभर आए हैं। कुछ शिक्षकों ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप प्रगतिशील कदम बताया है, जबकि अन्य ने चेतावनी दी है कि इससे शोध की बुनियाद कमजोर हो सकती है और प्रवेश प्रक्रिया में अस्पष्टता पैदा हो सकती है। शुक्रवार को अकादमिक परिषद (एसी) द्वारा मंजूर संशोधित पीएचडी नियमों के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। इस फैसले का विरोध करने वाले शिक्षकों का कहना है कि मास्टर डिग्री को दरकिनार करने से शोध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।पीजी नींव को मजबूत करता है मिरांडा हाउस की शिक्षिका आभा देव ...