नई दिल्ली, सितम्बर 2 -- नेपाल के रसुवा जिले में 26 अगस्त को आए भीषण ग्लेशियर ढहने और उसके बाद आई बाढ़ के दौरान जहां एक तरफ सैकड़ों जिंदगियां हाइड्रो इलेक्ट्रिक टनल में समा गईं, वहीं दूसरी तरफ इस त्रासदी ने हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र के अर्ली वार्निंग सिस्टम और भारत-चीन-नेपाल के बीच साझा प्रोटोकॉल के अभाव को उजागर कर दिया है। 'काठमांडू पोस्ट' और स्वतंत्र भू-वैज्ञानिकों की जांच के अनुसार, 26 अगस्त को सुबह 8:37 बजे ग्लेशियर टूटने के बाद बाढ़ की प्रचंड लहरें इतनी तेज थीं कि उन्होंने नदी के किनारे लगे जलस्तर मापने वाले गेज और संचार टावरों को कुछ ही मिनटों में उखाड़ फेंका।कोई अर्ली वार्निंग नहीं, केवल एक 'अकेला सेंसर' था नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अनिल पोखरेल ने बताया कि केवल सेंसर ल...