नई दिल्ली, अक्टूबर 10 -- राजस्थान में जोधपुर के दिनेश चौधरी ने यह साबित कर दिया है कि आपका फैमिली बैकग्राउंड कभी भी करियर की सफलता को तय नहीं करता। अगर मेहनत, लगन और धैर्य हो तो बुरे से बुरे हालातों में भी मंजिल पाई जा सकती है। एक वक्त था जब दिनेश 35 रुपये की दिहाड़ी मजदूर कर अपने परिवार का गुजारा चलाने में मां बाप की मदद करते थे। आज वह सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ( एसडीएम - SDM) बन गए हैं। जोधपुर जिले की बावड़ी तहसील के अणवाना गांव (ढाणी) से निकलकर आरएएस 2024 में 7वीं रैंक हासिल करने की उनकी यात्रा बेहद प्रेरणादायी है। उनकी कहानी इसलिए भी खास है कि वे बिना जयपुर या दिल्ली गए, गांव में घर पर रहकर ही डिजिटल रिसोर्सेज और ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़े। सरकारी नौकरी लगने के बावजूद संघर्ष करते गए।माता पिता कभी स्कूल नहीं गए दिनेश का परिवार गांव की ढाणी ...