पटना, सितम्बर 2 -- पटना हाईकोर्ट ने 32 वर्ष पुराने हत्या के एक मामले में आरोपित डोरिक साव को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायमूर्ति अनिल कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति आलोक कुमार की खंडपीठ ने जमुई फास्ट ट्रैक कोर्ट के आजीवन कारावास की सजा को निरस्त कर दिया। मामला 5 अगस्त 1993 का है। झाझा थाना क्षेत्र में चानो साव की हत्या हुई थी। आरोप था कि वह हत्या के आरोपित के साथ बंगाल में बीड़ी का काम करने गया था और जंगल के पास उसका शव मिला था। हाईकोर्ट ने कहा कि मामला पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है, कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। अंतिम बार साथ देखे जाने की बात भी साबित नहीं हो सकी है। बीड़ी विवाद में कंपनी मालिक को गवाह नहीं बनाया गया। जांच अधिकारी भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों के अभाव में दोषसिद्धि आदेश क...