हिन्दुस्तान ब्यूरो, जनवरी 4 -- बिहार में नदियों के संकटग्रस्त होने का सबसे बुरा प्रभाव भूजल स्तर पर पड़ रहा है। पिछले 50 वर्षों में राज्य का भूजल स्तर औसतन तीन गुना तक नीचे गया है। विशेषज्ञों के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में भूजल 300 फीट तक नीचे चला गया है। कई इलाकों में भूजल इतना नीचे चला गया है कि बड़ी संख्या में जलस्रोतों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। नदियों के लगातार सिकुड़ने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। जहां कभी 10-20 फीट पर पानी उपलब्ध हो जाता था, वहां अब 80 से 300 फीट तक बोरिंग करनी पड़ रही है। इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव खेती, पशुपालन, पेयजल व्यवस्था और नदी आधारित पारंपरिक रोजगार पर पड़ा है। नालंदा के बिहारशरीफ और नूरसराय में पहले 30 से 70 फीट पर पानी उपलब्ध था। अब 300 फीट गहरी सबमर्सिबल लगाना पड़ रहा है। नवादा के 80 वर्षीय ...
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